Monday, February 14, 2011

एक बेहतर देश और समाज

आज से ठीक एक सदी पहले जब हमारा देश गुलाम था उस साम्राज्य का जिसके बारे में कहा जाता था की वहां कभी सूरज नहीं डूबता,
फिर भी हमारे पूर्वज, देश के वीर पुरुष और महिलाएं लड़े इस उम्मीद में की उनकी आने वाली पीढ़ी यानी हम आजाद होकर रह सकें, उन्हें तो ये भी पता नहीं था की वो आजाद भारत में सांस भी ले पाएंगे या नहीं. उनके त्याग और बलिदान की वजह से हम आजाद हैं.
लेकिन क्या हम अपनी आने वाली पीढ़ी के बारे में सोच रहे हैं, क्या हमारी आने वाली पीढ़ी उस देश पर गर्व कर पायेगी जो हम उन्हें सौपेंगे.
हमारे समय की कई उपलब्धिया तो होंगी लेकिन हमारी नाकामियों के आगे उनका कोई महत्त्व नहीं होगा.
हमारी लड़ाई किसी साम्राज्य या व्यक्ति से नहीं बल्कि उन बुराइयों से है जो हमारे ही अन्दर हैं.
जैसे भ्रष्टाचार, आतंकवाद,प्रकति का अत्यधिक और अनावश्यक दोहन,देश-समाज और मिटटी के प्रति जागरूकता का अभाव.हमारी और हमारे पूर्वजो की लड़ाई की तुलना नहीं की जा सकती लेकिन हमारी लड़ाई कुछ कठिन है क्योकि हमारे दुश्मन हम खुद ही हैं. हमारी पिछड़ी सोच, अन्याय को सहते रहने की आदत, योग्यता की बजाये पैसे और ताकत का अभिनन्दन हमारी कुछ कमजोरिया हैं.अब समय आ गया हम इन बुराइयों के खिलाफ एकजुट हों.कहते हैं हजार मील का सफ़र भी पहले कदम से शुरू होता है, तो आइये पहला कदम साथ में उठायें. सफ़र बहुत लम्बा है हम थकेंगे भी, गिरेंगे भी लेकिन सफलता इस बात से नहीं मापी जाती कि हम कितनी ऊंचाई तक जाते है बल्कि इस बात से तय होती है कि हम गिरकर कितनी बार उठते हैं.कही पड़ा था "जीतेंगे वही जिन्हें मंजिल से नहीं रास्तो से प्यार होगा"
अगर आपके पास भ्रष्टाचार जैसी बुराइयों से लड़ने का कोई उपाय है तो उसे मेरे साथ बाँटिये. आप अपने शहर में इसके खिलाफ जो कर रहे हैं या करना चाहते हैं वह मुझे भी बताएं.मैं आपके बताये उपाय का इंतजार कर रहा हूँ.
हमें एक बेहतर देश और समाज बनाना ही पड़ेगा क्योकि आने वाली पीढ़ी को जवाब भी हमें ही देना है.

6 comments:

  1. भ्रष्टाचार जैसी बुराइयों को जद से हटाने का फिलहाल तो कोई उपाय नज़र नहीं आता है ..हर व्यक्ति को अपने स्तर पर ही प्रयास करने होंगे.
    'मिलिए रेखाओं के अप्रतिम जादूगर से '

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  2. जनजागरूकता के बगैर भ्रष्टचार पर काबू पाना मुश्किल है|

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  3. iska sabse accha upas yahi hai ki ham naitik mulyo ko samjhe... bhaccho ki prathmik shiksha me naitik gyan ko sammilit kiya jaye... main geeta press gorakhpur ki bohot aabhari hu wo hame ye kitabe bohot kam mulya me uplabdh karati hai.. par hame in mulyo ko failane par jor dena hoga :)

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  4. यह सिर्फ ज़ज्बा है जो हिंदुस्तान को हरेक मुसीबत से बचा कर ज़िन्दा रख रहा है, वर्ना मंडराते गिद्धों से सारा आसमान अँधेरा हो चला है !

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  5. "हमारी लड़ाई किसी साम्राज्य या व्यक्ति से नहीं बल्कि उन बुराइयों से है जो हमारे ही अन्दर हैं"

    सच्चा सटीक और नितांत आवश्यक सन्देश - यही सोच बनी रहे

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  6. इस सुंदर से चिट्ठे के साथ आपका हिंदी चिट्ठा जगत में स्‍वागत है .. नियमित लेखन के लिए शुभकामनाएं !!

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